साधक साधना में उपयोग की सामग्री (नैवेद्य, भोग) तथा अपना भोजन स्वयं तैयार करें। उस पात्र का जल २४ घण्टे बाद किसी वृक्ष पर चढ़ा दें। साधक, अनुष्ठान, जप के बाद भी नियमित मंत्र जप करते रहें। प्राचीन तंत्र शास्त्रों पर विश्वास कर साधना करें । कुछ नया जानने और https://billw097ckr5.dailyblogzz.com/profile